हड़प्पा सभ्यता,प्राचीन भारत की नगर सभ्यता का इतिहास

हड़प्पा सभ्यता, प्राचीन भारत की नगर सभ्यता का इतिहास
हड़प्पा सभ्यता की खोज
हड़प्पा
सभ्यता की खोज 20वीं शताब्दी में हुई।
1921 ई. में दयाराम साहनी ने हड़प्पा
(पंजाब, पाकिस्तान) की खोज की
1922 ई. में राखालदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो
की खोज की
इन खोजों ने
यह सिद्ध कर दिया कि भारत में भी मिस्र और मेसोपोटामिया के समकालीन एक महान सभ्यता
विकसित हुई थी।
हड़प्पा सभ्यता का भौगोलिक विस्तार
हड़प्पा
सभ्यता का विस्तार अत्यंत व्यापक था।
उत्तर में:-
जम्मू-कश्मीर (मांडा)
दक्षिण में:-
महाराष्ट्र (दैमाबाद)
पूर्व में:-
उत्तर प्रदेश (आलमगीरपुर)
पश्चिम में:-
बलूचिस्तान (सुत्कागेन्डोर)
यह सभ्यता भारत और पाकिस्तान के लगभग 14 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हुई थी।
प्रमुख नगर और स्थल
हड़प्पा
सभ्यता के प्रमुख नगर:-
हड़प्पा
मोहनजोदड़ो
धोलावीरा
(गुजरात)
कालीबंगा
(राजस्थान)
लोथल
(गुजरात)
राखीगढ़ी
(हरियाणा)
धोलावीरा की विशेषता
जल संरक्षण
की उत्कृष्ट व्यवस्था
तीन भागों
में विभाजित नगर संरचना
नगर योजना और स्थापत्य कला
हड़प्पा
सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता थी इसकी उन्नत नगर योजना।
नगर ग्रिड
पद्धति पर आधारित
सड़कें
एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं
पक्की ईंटों
से बने मकान
हर घर में
स्नानघर
ढकी हुई
नालियाँ
महान स्नानागार
मोहनजोदड़ो
का महान स्नानागार सामूहिक धार्मिक अनुष्ठानों का केंद्र माना जाता है।
सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था
हड़प्पा
समाज:-
संगठित और
अनुशासित था
प्रशासन
संभवतः केंद्रीकृत था
सामाजिक
समानता के संकेत मिलते हैं
राजमहल या
विशाल मंदिर का अभाव
यह दर्शाता
है कि समाज शांतिप्रिय और सामूहिक मूल्यों पर आधारित था।
आर्थिक जीवन,कृषि, उद्योग और व्यापार
कृषि
गेहूँ, जौ, कपास की खेती
सिंचाई के
प्रमाण
बैल और हल
का प्रयोग
उद्योग
मिट्टी के
बर्तन
मनके
निर्माण
कांस्य और
तांबे के औज़ार
व्यापार
आंतरिक और
विदेशी व्यापार
मेसोपोटामिया
से व्यापार के प्रमाण
लोथल में
बंदरगाह
कला और शिल्प
हड़प्पा कला
यथार्थवादी थी।
कांस्य की “नर्तकी” मूर्ति
पुजारी-राजा
की मूर्ति
मुहरें
(सील)
खिलौने और
आभूषण
मुहरों पर
पशु और प्रतीक चिन्ह अंकित हैं।
धर्म और धार्मिक विश्वास
हड़प्पा
धर्म के प्रमुख संकेत:-
मातृदेवी की
पूजा
पशुपति
(प्रोटो-शिव) मुहर
वृक्ष और
पशु पूजा
स्नान और
शुद्धता पर बल
मंदिरों का
अभाव इस बात की ओर संकेत करता है कि धर्म साधारण और प्रकृति-आधारित था।
लिपि और भाषा
हड़प्पा
लिपि:-
चित्रात्मक
दाएँ से
बाएँ लिखी जाती थी
अब तक अपठित
यही कारण है
कि इस सभ्यता के कई रहस्य आज भी बने हुए हैं।
हड़प्पा सभ्यता का पतन
हड़प्पा
सभ्यता के पतन के संभावित कारण:-
जलवायु
परिवर्तन
सरस्वती नदी
का सूखना
बाढ़ और
भूकंप
व्यापार में
गिरावट
आंतरिक
अव्यवस्था
हड़प्पा सभ्यता का ऐतिहासिक महत्व
भारत की
प्रथम नगरीय सभ्यता
उन्नत तकनीक
और योजना
सामाजिक
समानता का उदाहरण
भारतीय
संस्कृति की नींव
हड़प्पा
सभ्यता ने आगे चलकर वैदिक और भारतीय समाज को गहराई से प्रभावित किया।
निष्कर्ष
0 टिप्पणियाँ